Ramanand Sagar Biography | रामानंद सागर की जीवनी

Ramanand sagar biography in hindi : रामानंद सागर द्वारा बनाया गया धारावाहिक रामायण का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव रहा है। रामानंद सागर एक ऐसा व्यक्तित्व  जो हमारे भारत देश ही नहीं विश्व के कई देशों में किसी पहचान के मोहताज नहीं है।

हमारे भारत देश की बात करे तो शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति  हो जो रामानन्द सागर जी को ना जानता हो ।रामानन्द सागर जी ने ही भारत देश के सबसे लोकप्रिय और पूज्य भगवान श्री राम जी की लीला को अपने धारावाहिक “रामायण“  से घर घर तक पहुँचाया जिसे घर के बच्चे वयस्क और  बुजुर्ग बहुत चाव से देखते थे और आज भी पूरा परिवार बैठ कर  रामायण  देखता है। आज हम रामानन्द सागर जी से जुड़ी वो सभी बातें  जानेंगे जिसे जानने की इच्छा आप सबके मन में है ।

रामानंद सागर (Ramanand Sagar) जी का प्रारम्भिक जीवन- 

 रामानन्द सागर जी का जन्म 29 DECEMBER 1917 को लाहौर के नज़दीक असल गुरु नामक गाँव में हुआ था जो आज पाकिस्तान का हिस्सा है।रामानन्द सागर जी का जन्म काफ़ी सम्पन्न परिवार में हुआ था।

image source :Wikipedia

रामानंद सागर जी का बचपन अपनी नानी नाना के पास व्यतीत हुआ, क्योंकि जन्म लेते ही इनकी नानी ने इन्हें गोद ले लिया था।इनकी नानी का कोई बेटा नहीं था।

Ramanand Sagar जी का नाम “चंद्रमौली चोपड़ा “ था, लेकिन नानी ने गोद लेने का बाद इनका नाम बदल कर रामानन्द सागर रख दिया था।

Ramanand Sagar जी माँ की मृत्यु के बाद इनके पिता ने दूसरा विवाह कर लिया था,आपको शायद ये जानकर हैरानी होगी कि “विधु विनोद चोपड़ा” इनके सौतेले भाई है जिन्होंने  “MUNNA BHAI MBBS”  जैसी सफल मूवी बनायी है।जब इनका विवाह तय हुआ तो इन्होंने दहेज लेने का विरोध किया जिसकी वजह से इन्हें घर से निकाल  दिया गया। 

Ramanand Sagar जी ने “लीलावती” से विवाह किया और इनकी बेटी का नाम “सरिता सागर” है और बेटे का नाम “प्रेम सागर “है।

Ramanand Sagar संघर्ष और सफलता – 

16 वर्ष की आयु में श्रीनगर के प्रताप कॉलेज ने इनकी लिखी कविता को अपने मैगज़ीन में प्रकाशित करने के लिए चुना गया ।घर से निकाले जाने के बाद इन्होंने अपनी पढ़ायी को जारी रखा ओर उनके लिए चपरासी, ट्रक सफ़ायी, और दुकान पे भी काम किया।

Ramanand Sagar जी की  मेहनत धीरे धीरे रंग ला रही थी, सन 1942 में पंजाब यूनिवर्सिटी ने संस्कृत में मेधावी छात्र होने के लिए उन्हें उन्हें “स्वर्ण पदक “दिया और साथ ही साथ फ़ारसी भाषा में भी उनकी अच्छी पकड़ थी ,जिसके लिए उन्हें  “मुंशी फ़ज़ल” के किताब से सम्मानित किया गया।

 इनके जीवन ने यहाँ से एक करवट ली और उसके बाद इन्होंने कभी पीछे मुड़ कर कभी नहीं देखा,उसस समय के  प्रसिद्ध अख़बार “डेली मिलाप “

के एडिटर के रूप में भी इन्होंने नौकरी की,लेकिन इनको असली ख्याति मिलना अभी बाक़ी था,और  इनको अमर कर देने वाली कथा की तो अभी बस शुरूवात हुई थी जो इन्हें “रामायण “ से मिलने वाली थी।

सागर आर्ट्स/सागर फ़िल्म्ज़ प्राइवट  लिमिटेड  की स्थापना :-

भारत पाकिस्तान के विभाजन  के बाद रामानन्द सागर जी बॉम्बे (मुंबई) आ गए ओर इन्होंने सन 1950 में अपनी फ़िल्म्ज़ ओर टेलिविज़न प्ररोडक्शन कम्पनी “सागर आर्ट्स “ की स्थापना की जो आज सागर  फ़िल्म्ज़  प्राइवट लिमिटेड के नाम से जानी जाती है।

इन्होंने कई सारी फ़िल्म्ज़ के लिए DIALOGUE लिखे कई सारी फ़िल्म्ज़ को PRODUCE  किया ओर कई सारी फ़िल्मस को DIRECT भी किया।

भारत पाकिस्तान विभाजन के अपने अनुभव के आधार पे “और इंसान मर गया “ नामक एक किताब भी लिखी है।

रामानंद सागर जी ने सिर्फ़ पिक्चर्स ही नहीं टेलिविज़न के लिए भी उस समय के बहुत प्रसिद्ध धारावाहिकों का निर्माण किया है जिनमे से कुछ आज भी बहुत प्रसिद्ध है और आज भी लोग उन धारावाहिकों को देखना पसंद करते है।

प्रसिद्ध धारावाहिक :-

 “रामायण” / Ramayan,अलिफ लैला ,विक्रम और  बेताल ,कृष्णा,,लव कुश,साई बाबा  इनके द्वारा बनाए गए सबसे प्रसिद्ध धारावाहिक थे,आप ने भी इन धारावाहिकों को ज़रूर देखा होगा,कहा जाता है की उसस समय जो भी कलाकार Ramanand Sagar जी के साथ काम करता था उसे बड़े पर्दे पे आसानी से काम मिल जाता था।

इनके द्वारा बनाए गए सभी धारावाहिक अपने समय में बहुत प्रसिद्ध हुए ओर आज भी लोग इन्हें बहुत चाव से पूरे परिवार के साथ बैठ कर देखते है ।

“रामायण” इनके द्वारा बनाया गया सबसे लोकप्रिय  धारावाहिक है जो कि भगवान श्री राम के जीवन पे आधारित है,कहते है की उस समय जिस  किसी के घर पे टेलिविज़न होता था वो “रामायण “के प्रसारण के समय सारे काम छोड़ कर देखने बैठ जाता था,कहा जाता है की सड़कों पे भीड़ ख़त्म  हो जाती थी रामायण के प्रसारण के समय ओर हर कोई टेलिविज़न के सामने बैठ जाता था।

उस समय “रामायण “ को देखने वालों की संख्या 10 करोड़ थी।

“रामायण” को “LIMCA BOOK OF RECORD” में सबसे ज़्यादा दिन तक 25 JANUARY 1987 से JUNE 2003 तक दुनिया का सबसे ज़्यादा देखे जाने वाले धार्मिक धारावाहिक के नाम के  रूप में दर्ज है। 

पुरस्कार और सम्मान :-

Ramanand Sagar जी को 1969 में पिक्चर आँखे के  निर्देशन के लिए FILMFARE AWARD दिया गया।

सन 2000 में भारतीय फ़िल्म इंडस्ट्री में इनके अभूतपूर्व योगदान के लिए इन्हें भारत के सर्व्श्रेस्ट नागरिक सम्मान “पद्मा श्री “ से सम्मानित किया गया।

एक युग का अंत :-

Ramanand Sagar जी ने भारतीय फ़िल्म इंडस्ट्री और  छोटे पर्दे को सफलता के मुक़ाम तक ले गए,इनका योगदान बहुमूल्य है,हमारे दिलों में अपनी  छाप छोड़ कर  12 DECEMBER 2005 को 87 वर्ष की आयु में इनका देहांत हो गया।

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